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कवि के हृदय में कैसी व्यथा है?

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कवि संसार में हो रहे संहार के दृश्यों को देखकर बहुत दुखी है। उसे लगता है कि ऐसी स्थिति में उसकी चिंता करनेवाला कोई नहीं है। उसकी करुण कथा को सुनने में किसी की दिलचस्पी नहीं है। कवि अपनी पौड़ा के पूंट पी लेने में ही अपनी भलाई समझता है। सारी दुनिया को दुःख में डूबो देखकर वह भी गम के समुद्र में डूब जाना बेहतर मानता है। उसे लगता है कि ऐसी स्थिति में उसका कोई भी निशाना सही बैठनेवाला नहीं है। इस प्रकार कवि के हृदय में घोर दुःख और निराशा है।



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