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कवि बच्चन ने जगत को अपूर्ण क्यों माना है? स्पष्ट कीजिए।

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पूर्णता के बारे में कवि बच्चन के अपने विचार हैं। जीवन में निरंतर भाग-दौड़-सी मची दिखाई देती है। लोग अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए शुभ-अशुभ सभी प्रकार के उपाय अपनाते हैं। बच्चन का विश्वास जीवन को प्रेम और मस्ती के साथ बिताने में हैं। सुख-भोगों के पीछे भागना उन्हें नहीं सुहाता । इसीलिए उन्हें यह संसार अधूरा-सा लगता है और वह अपने सपनों के संसार में मस्त रहते हैं।



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