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कवि बच्चन के अनुसार आदर्श जीवन का स्वरूप क्या है? |
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Answer» मानव-जीवन का आदर्श स्वरूप क्या हो? इस पर विद्वानों और दार्शनिकों के अलग-अलग विचार रहे हैं। धर्म-पालन, परोपकार, त्याग आदि के साथ लगे यश और धन की प्राप्ति को भी जीवन के स्वरूप से जोड़ते रहे हैं। ‘आत्म-परिचय’ कविता से बच्चन जी के आदर्श-जीवन का स्वरूप बहुत कुछ ज्ञात होता है। कवि सबको स्नेह बाँटने वाले, धन संग्रह से दूर रहने वाले, अपनी मस्ती में मस्त, सुख-दुख में समान भाव रखने वाले जीवन को ही आदर्श जीवन का स्वरूप मानता है। |
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