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“कथनी और करनी में अंतर” विषय पर अपने दोस्त ने जो विचार लिखे हैं, उन्हें पढ़िए। |
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Answer» ‘कथनी और करनी में अंतर’ इस विषय पर मेरे दोस्त ने लिखा है, “मैंने बहुत कोशिश की कि मैं जैसा कहूँ, वैसा ही करूँ, परंतु मुझे सफलता नहीं मिली। मैंने एक दिन माँ से कहा कि कल मैं सुबह जल्दी उठकर टहलने जाऊँगा। दूसरे दिन माँ मुझे जगाते-जगाते थक गई, पर मैं नहीं उठा। मेरी कथनी और करनी में हमेशा जमीन-आसमान का अंतर रहा। मेरे विचार से कहना बहुत आसान है, पर अपने कहे हुए को व्यवहार में लाना बहुत मुश्किल है। फिर भी मैं कोशिश करूँगा कि मेरी कथनी और करनी में अंतर न हो। यदि मुझे कुछ बनकर दिखाना है, तो अपनी कथनी को करनी में बदलना ही होगा।” |
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