हाय राम कैसे झेलें हम अपनी लज्जा अपना शोकगया हमारे ही हाथों से अपना राष्ट्र पिता परलोकहुआ न यह भी भाग्य अभागाकिस पर विकल गर्व यह जागारहे स्मरण ही आतेसखि वे मुझसे कहकर जाते
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