1.

कृष्णभक्ति काव्यधारा की प्रमुख प्रवृत्तियों एवं कवियों का उल्लेख कीजिए।

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भक्तिकालीन कृष्णभक्ति काव्यशाखा की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं

  • उपास्यदेव श्रीकृष्ण हैं।
  • कृष्ण के बाल-स्वरूप एवं किशोर अवस्था की लीलाओं का वर्णन हुआ है।
  • दास्य एवं सखा-भाव की भक्ति-भावना है।
  • वात्सल्य रस का चरमोत्कर्ष प्रस्तुत हुआ है।
  • श्रृंगार के संयोग एवं वियोग-दोनों पक्षों का सुन्दर चित्रण हुआ है।
  • प्रकृति-वर्णन उद्दीपन रूप में हुआ है।
  • भाव और भाषा का उत्कृष्ट रूप है।
  • मुक्तक शैली की प्रधानता है।

प्रदुख कवि हैं – सूर, नन्ददास, कुम्भनदास, मीरा, रसखान आदि।



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