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कृष्ण के स्वाँग में गोपियों का वर्णन कीजिए।

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गोपियों को किसी तरह कृष्ण को पाना है। वियोग में वे कृष्ण का स्वांग रचकर उन्हें पाने के सुख का अनुभव करना चाहती हैं। इसलिए वे स्वयं कृष्ण का रूप धारण करना चाहती हैं। इसके लिए उन्होंने सिर पर मोर पंख का मुकुट पहना है। अपने गले में धुंधची के लाल दानों की माला पहनी हैं। वे अपने शरीर पर पीतांबर ओढ़ेगी।

इतना ही नहीं, कृष्ण की तरह हाथ में लकुटी लेकर वे ग्वालों के साथ वन में गाएं चराने भी जाएंगी। उनके प्यारे कृष्ण जो-जो कार्य करते थे, वे सब वे भी करेंगी। कृष्ण की मुरली से उन्हें ईर्ष्या है, इसलिए उसे अपने होंठों पर धारण नहीं करेंगी। इस प्रकार रसखान ने कृष्ण के स्वांग में गोपियों का भावपूर्ण वर्णन किया है।



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