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कर्ण की अभिलाषा

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कर्ण दानी पुरुष है। वह प्रतिदिन जरूरतमंद लोगों को दान देता है। उसे राज्य पाने की इच्छा नहीं है। वैभव पाकर भोग-विलास में जीना उसके स्वभाव के विरुद्ध है। वह दयालु और उदार वृत्ति का है। गरीबों के प्रति उसके मन में करुणा है। उसकी यही अभिलाषा है कि वह अपनी दानवृत्ति से निर्धनों का दुःख दूर करता रहे।



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