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कर्ण गरुड़ को अपना आदर्श क्यों मानता है? अथवा कर्ण स्वयं को गरुड़ क्यों मानता है?

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गरुड़ कबूतरों की तरह महलों के सुनहले शिखरों में रहना पसंद नहीं करता। वह पहाड़ों या चट्टानों की दरारों में रहता है। नागपाश से छुड़ाने की शक्ति गरुड़ में ही होती है। कर्ण का स्वभाव भी गरुड़ के समान है। राजपाट और वैभव-विलास को वह पसंद नहीं करता। वह मित्र दुर्योधन को युद्ध के नागपाश से छुड़ाना चाहता है। इस प्रकार गरुड जैसा स्वभाव होने के कारण कर्ण उसे अपना आदर्श मानता है।



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