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'‘कोसी से बस चली तो रास्ते का सारा दृश्य बदल गया।” उस दृश्य का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए? |
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Answer» कोसी तक का रास्ता अच्छा नहीं था। कोसी से बस चली तो रास्ते का दृश्य बदल गया, पत्थरों पर कल-कल करती हुई कोसो बह रही थी। उसके किनारे छोटे-छोटे गाँव और हरे-भरे खेत थे। सोमेश्वर की वह घाटी बहुत सुन्दर थी। मार्ग में कोसी नदी तथा उसमें गिरने वाले नदीनालों के पुल थे। एक के बाद एक बस स्टेशन, पहाड़ी, डाकखाने, चाय की दुकानें आदि भी रास्ते में मिले। कहीं-कहीं सड़क निर्जन चीड़ के जंगलों से गुजरी। सड़क टेढ़ी-मेढ़ी, ऊँची-नीची तथा केंकरीली थी। उस पर बस धीरे-धीरे चल रही थी। रास्ता सुहाना था। |
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