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कंडक्टरने अपनी ईमानदारी कैसे बताई ?

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एक बार लेखक सपरिवार बस-यात्रा कर रहे थे। गंतव्य स्थान से लगभग पांच मील पहले एक सुनसान स्थान पर बस खराब हो गई। कंडक्टर समझ गया कि यह बस अब आगे नहीं जा सकती। वह एक साइकिल लेकर चला गया। उस समय रात के दस बजे थे। यात्री बस-ड्राइवर पर अपना क्रोध उतारने लगे। लेखक के बच्चे भोजन और पानी के लिए व्याकुल थे। यात्री ड्राइवर को मारने के लिए तैयार हो गए। ठीक उसी समय बस-कंडक्टर एक खाली बस लेकर आया। यात्री उसमें सवार हो गए। कंडक्टर लेखक के बच्चों के लिए पानी और दूध भी लाया था। इस तरह बस-कंडक्टर ने अपनी ईमानदारी और सज्जनता बताई।



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