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किसी देखे हुये सिनेमा की कहानी सुनाओ। |
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Answer» बच्चे स्वाति बूंदों की तरह शुद्ध और स्वच्छ होते हैं। आजकल प्रायः घर-घर में टॉपर्स और “रॉकर्स” तैयार करने की कोशिश की जा रही है। कई लोग यह नहीं सोचते कि बच्चों के मन में क्या है ? वे क्या सोचते हैं और उनके विचार क्या हैं? इन प्रश्नों का जवाब आमिर खान अपने फ़िल्म ‘तारे ज़मीं पर’ में दिखाया। फ़िल्म की कहानी इस प्रकार है। आठ वर्षीय ईशान अवस्थी का मन पढ़ाई के बजाय कुत्तों, मछलियों को पकड़ने में, पेंटिंग में लगता है। माता – पिता चाहते हैं कि वह अपनी पढ़ाई पर ध्यान दें। ईशान घर पर माता-पिता की डॉट खाता है और स्कूल में अध्यापकों की । वे ईशान की मन के बारे में सोचने के बजाय ईशान को बोर्डिंग स्कूल में भेज देते हैं। बोर्डिंग स्कूल में ईशान हमेशा उदास रहता है। वहाँ के कला अध्यापक रामशंकर निकुंभ, ईशान के बारे में सोचते हैं और पता कर लेते हैं कि वह ‘डिसलेक्सिया’ की समस्या से पीडित है। उसे अक्षरों को पढ़ने में तकलीफ़ होती है। निकुंभ सर अपनी प्यार और दुलार से ईशान के अंदर छिपी प्रतिभा को सबके सामने लाते हैं। कहानी तो सरल है कुछ दृश्य देखने से कई लोगों को अपने बचपन की याद आती है। अंत में ईशान को चित्रकारी प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार मिलता है। इस चित्र में ईशान को देखकर हमें ऐसा लगता है कि उसने नवरसों को अपने चेहरे में दिखाया है। |
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