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किरायेदार को शर्मिंदा क्यों होना पड़ा?

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किरायेदार अपने घर में एक मित्र से बातें कर रहा था। उसी समय मकान-मालिक उससे चार महीने से बाकी किराया लेने आया। उसने दरवाजा खटखटाया। किरायेदार ने खिड़की से झाँककर उसे देखा। उसने अपने बेटे को समझाकर बाहर भेजा। बेटे ने कहा, “पिताजी कहते हैं कि वे घर पर नहीं हैं।” बेटे की बात सुनकर मकान-मालिक हँसने लगा। घर में बैठा मित्र मुस्कराया। इस तरह किरायेदार मित्र को अपनी कथनी और करनी में अंतर के लिए शर्मिंदा होना पड़ा।



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