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ख्याति के मूल्यांकन के लिये सादी (सरल) औसत लाभ की पद्धति समझाओ ।

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सरल (साधारण) औसत लाभ की पद्धति (Average Profit Method) : ख्याति के गणना की यह बहुत ही प्रचलित पद्धति है । भूतकाल के कुछ वर्षों के लाभ का औसत निकाला जाता है, सामान्यत: 3 या 5 वर्ष के लाभ का औसत लिया जाता है । इस औसत लाभ को कुछ वर्षों से गुणा किया जाता है । इस प्रकार गुणा करने का उद्देश्य है कि इतने वर्षों की बेचनेवाले की महेनत से खरीदनेवाले को अधिक लाभ मिल सकता है । इस प्रकार की पद्धति समझने में और गणना में सरल है ।

उदा. निम्न दिये गये लाभ पर से साधारण औसत लाभ की पद्धति से 3 वर्ष की खरीदी के आधार पर ख्याति की गणना करो ।

वर्ष – लाभ (₹)
2,000 – 8,000
2001 – 9,000
2002 – 12,000
2003 – 11,000
कुल लाभ = ₹ 40,000
औसत लाभ = कुल लाभ/वर्ष की संख्या
= 40,000/4 = 10,000
ख्याति = औसत लाभ × ख्याति की खरीदी के वर्ष
= 10,000 × 3 = ₹ 30,000

सरल औसत पद्धति की गणना में लाभ के बढ़ने या घटनेवाले रुख को ध्यान में नहीं लिया जाता । तथा यह भी मान्यता है की नजदीकी भविष्य में लाभ में किसी भी प्रकार का कोई भी परिवर्तन ध्यान में नहीं लिया जाता । इसके अलावा धंधे में लगायी गई पूँजी को भी इस पद्धति में ध्यान में नहीं लिया जाता



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