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कहाूँतो तय था वचरागाूँहरेक घर केवलए ,कहाूँवचराग मयस्सर नहीं शहर केवलए।यहाूँदरख्तों केसायेमेंधूप लगती है,चलो यहाूँसेचलेंऔर ईम्र भर केवलए।न हो कमीज तो पाूँिों सेपेट ढूँक लेंगे,येलोग दकतनेमुनावसब हैंआस सफ़र केवलए।(क) ’वचरागाूँ’ प्रतीक है?(ख) दरख्तों केसाए मेंधूप लगनेका व्यंग्य स्पष्ट कीवजए।(ग) कवि पलायनिादी क्यों बनना चाहता है?(घ) पाूँिों सेपेट ढूँक लेनेिालेलोगों केमाध्यम सेदकन पर व्यंग्य दकया गया है? |
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