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कहानी के लगभग सभी पात्र समाज की किसी न किसी सच्चाई को उजागर करते हैं। निम्नलिखित पात्रों के संदर्भ में पाठ से उस अंश को उदत करते हुए बताइए कि यह समाज की किस सच्चाई को उजागर करते हैं –(क) वृद्ध मुंशी(ख) वकील(ग) शहर की भीड़

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(क) वृद्ध मुंशी : वृद्ध मुंशी समाज में ऐसा पिता है जो धन को महत्त्व देनेवाला भ्रष्ट व्यक्ति है । वह अपने पुत्र वंशीधर को भी भ्रष्टाचार की ही शिक्षा देता है । वृद्ध मुंशी अपने पुत्र को समझाते हुए कहता है कि ‘मासिक वेतन तो पूर्णमासी का चाँद है जो एक दिन दिखाई देता है और घटते-घटते लुप्त हो जाता है ।ऊपरी आय बहता हुआ स्रोत है जिससे सदैव प्यास बुझाती है ।’ इस प्रकार युद्ध मुंशी के माध्यम से प्रेमचंद जी ने समाज में फैले भ्रष्टाचार को उजागर किया है । साथ ही समाज की उस सच्चाई को भी उजागर किया है कि भ्रष्टाचार समाज में इस प्रकार पैठ (घुस) गया है कि मुंशी जैसे पिता उसे शिष्टाचार या नैतिक मानने लगे हैं ।

(ख) वकील : कहानी में वकील के माध्यम से वकीलों के चरित्र को उजागर किया है । जैसे धन को लूटना ही वकीलों का कर्तव्य है । धन के लिए ये अनैतिक को नैतिक, अयोग्य को योग्य और गैरकानूनी को कानूनी सिद्ध कर देते हैं । इस बात का उदाहरण भ्रष्ट पंडित अलोपीदीन को कोर्ट में से छुड़वाने के लिए वकीलों की सेना तैयार हो जाती है । और धन-बल पर अलोपीदीन को छुड़वा लेते हैं । मजिस्ट्रेट के अलोपीदीन के हक में फैसला सुनाने पर यकील खुशी से उछल पड़ता है ।

(ग) शहर की भीड़ : शहर की भीड़ दूसरों के दुखों में तमाशे जैसा मजा लेती है । पाठ में एक स्थान पर कहा गया है – “भीड़ के मारे छत और दीवार में भेद न रह गया ।’ भीड़ के माध्यम से प्रेमचंदजी ने स्पष्ट किया है कि भीड़ की अपनी विचारधारा नहीं होती है । वह हमेशा प्रवाह के साथ बहने लगती है । जो भीड़ अलोपीदीन को कृत्य के लिए निंदा कर रही थी वही उसके, छूटने पर वंशीधर पर कटुवचन और व्यंग्यवाणों की वर्षा होने लगी ।



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