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केन्द्रीय सरकार की आय के स्रोतों का वर्णन कीजिए।याकेन्द्र सरकार द्वारा लगाये जाने वाले किन्हीं तीन करों का वर्णन कीजिए।

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केन्द्रीय सरकार की आय के स्रोत

केन्द्रीय सरकार की आय के स्रोतों को मुख्य रूप से दो भागों में बाँटा जा सकता है – (i) कर राजस्व अर्थात् कर क्षेत्र से प्राप्त आय तथा (ii) कर भिन्न राजस्व अर्थात् गैर-कर क्षेत्र से प्राप्त आय। इसके अतिरिक्त केन्द्र सरकार की आय के स्रोतों में पूँजी प्राप्तियाँ भी हैं। पूँजी प्राप्तियों के अन्तर्गत ऋणों की वसूलियाँ, अन्य प्राप्तियाँ (विदेशी सहायता), उधार व अन्य देयताएँ, हुण्डियाँ आदि सम्मिलित रहती हैं। प्रस्तुत प्रश्न के अन्तर्गत कर व गैर-कर से प्राप्त आय का ही वर्णन किया जाएगा –

कर राजस्व से प्राप्त आय कर राजस्व के अन्तर्गत आने वाले प्रमुख करों का विवरण निम्नलिखित है –

1. आयकर – आयकर केन्द्र सरकार की आय का महत्त्वपूर्ण स्रोत है, परन्तु वित्त आयोग की सिफारिश के अनुसार इसका एक निश्चित भाग राज्य सरकारों में वितरित किया जाता है। भारत में सर्वप्रथम 1950 ई० में आयकर लगाया गया था। कर की छूट सीमा उस समय र 2,000 वार्षिक थी। वर्ष 2012-13 के बजट में है 2,00,000.00 तक की वार्षिक आय को कर-मुक्त रखा गया है।

2. निगम कर – कम्पनियों पर लगे आयकर को ‘निगम कर’ कहते हैं। निगम कर में आय की भाँति छूट की कोई सीमा नहीं होती। इसके अतिरिक्त इसकी दरें प्रायः समानुपातिक होती हैं। वर्ष 2012-13 के लिए यह दर 30% है तथा इस पर 10 प्रतिशत अधिभार भी देय होगा।

3. केन्द्रीय उत्पादन कर – ये कर केन्द्र सरकार द्वारा देश में उत्पादित वस्तुओं पर लगाये जाते हैं। यह सीमेण्ट, कपड़ा, बिजली का सामान, मिट्टी का तेल, पेट्रोल, डीजल, रेफ्रीजरेटर, टेलीविजन, तम्बाकू, चाय, कॉफी, जूट व रेशम के सामान आदि के उत्पादन पर लगाया जाता है। वर्तमान समय में यह केन्द्रीय सरकार की आय का सबसे महत्त्वपूर्ण साधन है। इस कर-प्रणाली के अन्तर्गत पहले केवल 15 वस्तुओं पर कर लगाया जाता था, परन्तु वर्तमान समय में 1,300 से अधिक वस्तुओं को इस करे-व्यवस्था के अन्तर्गत लाया गया है।

4. सीमा-शुल्क – सीमा शुल्क में आयात-कर व निर्यात-कर आते हैं। आयात-कर विदेशों से मँगाये गये माल पर तथा निर्यात-कर अपने देश से बाहर वस्तु को भेजने पर लगाया जाता है। सीमा-शुल्क केन्द्र सरकार की आय का महत्त्वपूर्ण स्रोत होता है।

5. सम्पत्ति कर – भारत में यह कर प्रो० कॉल्डर की सिफारिश पर 1 अप्रैल, 1957 ई० में लगाया गया था। सम्पत्ति कर का प्रशासन आयकर विभाग द्वारा ही चलाया जाता है। यह कर व्यक्तियों की है 10 लाख से अधिक की सम्पत्ति पर लगाया जाता है। इस कर से कृषि भूमि, धार्मिक स्थानों की सम्पत्ति, बीमा व विकास बॉण्ड, प्रॉविडेण्ट फण्ड आदि को मुक्त रखा गया है।

6. सेवा कर – यह कर विभिन्न प्रकार की प्रत्त सेवाओं पर लगाया जाता है। इसकी दर 12% है। वर्ष 2006-07 के बजट में चार लाख रुपये तक के वार्षिक टर्न ओवर को इससे मुक्त रखा गया है। उपर्युक्त मुख्य करों के अतिरिक्त केन्द्रीय सरकार को –

  1. ब्याज कर
  2. व्यय कर
  3. आस्ति कर या मृत्यु कर (सन् 1953 में आरोपित और 1985-86 ई० में समाप्त)
  4. उपहार कर (सन् 1958 में आरोपित और 1999-2000 ई० में समाप्त, वर्तमान में प्राप्तकर्ता की आय में सम्मिलित)
  5. अन्य कर और शुल्क
  6. संघ-राज्य क्षेत्रों के कर से भी आय प्राप्त होती है।

गैर – कर राजस्व से प्राप्त आय – इनके अन्तर्गत आने वाले प्रमुख करों का विवरण निम्नलिखित है –

1. ब्याज प्राप्तियाँ – केन्द्र सरकार राज्यों, केन्द्रशासित प्रदेशों एवं केन्द्रीय प्रतिष्ठानों को ऋण देती है। इन ऋणों पर ब्याज की प्राप्ति होती है, जो उसकी आय का एक स्रोत है।

2. मुद्रा, सिक्का ढलाई एवं टकसाल – केन्द्र सरकार को नोट छापने एवं सिक्का ढलाई का एकाधिकार प्राप्त है। इससे भी उसको आय प्राप्त होती है।

3. लाभांश व लाभ – इसके अन्तर्गत भारतीय रिजर्व बैंक, अन्य राष्ट्रीयकृत व्यापारिक बैंक व केन्द्र सरकार के व्यावसायिक उपक्रमों से प्राप्त लाभ को सम्मिलित किया जाता है।

4. सामान्य सेवाओं से आय – इस मद के अन्तर्गत लोक सेवा आयोग, पुलिस, रेल, रक्षा-सेवाएँ आदि | मदों से प्राप्त आय सम्मिलित की जाती है।

5. सार्वजनिक उपक्रमों से आय – इसमें सार्वजनिक प्रतिष्ठानों से प्राप्त आय सम्मिलित होती हैं; जैसे–इण्डियन ऑयल, प्राकृतिक तेल एवं गैस आयोग, राज्य व्यापार निगम, डाक तार, रेल आदि से प्राप्त आय।

6. सामाजिक एवं सामुदायिक सेवाएँ – सामाजिक व सामुदायिक सेवाओं में मुख्य हैं – शिक्षा, चिकित्सा, परिवार नियोजन, सफाई व जल आपूर्ति, आवास, नगर विकास, सूचना एवं प्रसार, सामाजिक सुरक्षा व कल्याण आदि। इनसे भी केन्द्र सरकार को आय प्राप्त होती है।

7. आर्थिक सेवाएँ – इनमें मुख्य रूप से सहकारिता, कृषि, लघु सिंचाई, भू-संरक्षण, पशुपालन, डेयरी विकास, मत्स्य उद्योग, ग्रामोद्योग व लघु उद्योग, खनन व खनिज पदार्थ, बहुउद्देशीय नदी-घाटी योजनाएँ, विद्युत विकास सेवाएँ, सड़कें, पुल आदि आते हैं। इन सेवाओं से भी केन्द्र सरकार को आय प्राप्त होती है।



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