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कैसे मंगलमय प्रभात की कल्पना की थी? और कैसी अँधेरी कालरात्रि आ गयी है?

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जीवन में कभी ऐसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है कि होना कुछ और होता है और अंत समय में हो कुछ और जाता है। अयोध्या में राम राज्याभिषेक के मंगलमय प्रभात की कल्पना की गई थी। अयोध्या में खुशियां मनाई जानेवाली थीं, पर ऐन वक्त पर स्थिति एकदम बदल गई और राम को निर्वासित होना पड़ा। उनके वियोग में अयोध्या को शोक में डूब जाना पड़ा। अयोध्या को कालरात्रि ने अपने आगोश में ले लिया और पूरे नगर में शोक की लहर व्याप्त हो गई।



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