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जल-विद्युत शक्ति के उत्पादन के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाओं का वर्णन कीजिए तथा विश्व में इसके उत्पादन पर प्रकाश डालिए। |
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Answer» जल-विद्युत का महत्त्व जल-विद्युत शक्ति को ऊर्जा का अक्षय स्रोत माना जाता है। जब तक धरातल पर नदियाँ प्रवाहित होती रहेंगी, तब तक अनवरत गति से जल-विद्युत शक्ति का उत्पादन होता रहेगा। वास्तव में वर्तमान समय में जल-विद्युत शक्ति किसी राष्ट्र के आर्थिक विकास एवं प्रगति का द्योतक है। अन्य शक्ति के संसाधनों की अपेक्षा यह शक्ति अधिक सस्ती एवं सुगम पड़ती है, क्योंकि इसके उत्पादन के लिए एक ही बार व्यय करना पड़ता है। इसके बाद अनवरत गति से उत्पादन प्राप्त होता रहता है। इसे दूरवर्ती उपभोक्ता केन्द्रों तक तारों की सहायता से सुगमतापूर्वक भेजा जा सकता है। जल-विद्युत शक्ति उत्पादन के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाएँ (अ) भौतिक दशाएँ Physical Conditions ⦁ जलप्रपातयुक्त धरातलीय बनावट – प्राकृतिक जलप्रपात, कृत्रिम प्रपातों की अपेक्षा जल-शक्ति के लिए उत्पादन के अधिक अनुकूल होते हैं। इसकी सहायता से बहता हुआ जल ऊँचाई से गिरक़र अपने धक्के से टरबाइन को घुमाता रहता है। अतः प्रपातों की ऊँचाई जितनी अधिक होगी, उतनी ही अधिक मात्रा में शक्ति का उत्पादन सम्भव होगा। ⦁ अत्यधिक वर्षा का होना – नदियों के उद्गम क्षेत्रों में भारी वर्षा होनी अति आवश्यक है, जिससे नदियों में पर्याप्त मात्रा में जल सतत रूप से प्रवाहित होता रहे। ⦁ जल की समान मात्रा का प्रवाहित होना – नदियों में प्रवाहित जल की मात्रा एकसमान रहनी चाहिए। जल को नियन्त्रित करने के लिए मार्गों में जलाशयों एवं बाँधों का निर्माण किया जाना अत्यावश्यक है। ⦁ ढाल की तीव्रता – तीव्र ढाल की स्थिति में नदियों की घाटियों में कई स्थानों पर प्रपातों की सहायता से जल-विद्युत शक्ति को उत्पादन सुगमता से कर लिया जाता है। ⦁ शीतोष्ण जलवायु – जल-विद्युत उत्पादन क्षेत्रों का तापमान शीत ऋतु में भी हिमांक से ऊपर रहना चाहिए, जिससे नदियों का जल हिम में परिणत न हो सके। इसी कारण इसके लिए शीतोष्ण जलवायु उपयुक्त रहती है। ⦁ जलधाराओं के मार्ग में झीलों की उपस्थिति – यदि बहते हुए जल के मार्ग में हिमानियों द्वारा निर्मित झीलें पड़ जाएँ तो वे बहुत ही उपयुक्त रहती हैं। इन झीलों द्वारा तलछट (अवसाद) को रोक लिया जाता है, जिससे जल स्वच्छ हो जाता है। ⦁ अन्य शक्ति संसाधनों का अभाव – यदि किसी प्रदेश में शक्ति के अन्य संसाधन; जैसे- कोयला, खनिज तेल, गैस आदि न हों तो जल-विद्युत शक्ति के विकास की अधिक सम्भावनाएँ रहती हैं। एवं इसके उत्पादन का भी सतत प्रयत्न किया जाता है। (ब) आर्थिक दशाएँ Economic Conditions ⦁ उपभोक्ता क्षेत्रों की समीपता – जल-शक्ति उत्पादक केन्द्रों के समीप ही विद्युत की माँग के क्षेत्र होने चाहिए। इसके लिए सघन जनसंख्या, उद्योग-धन्धे एवं व्यापारिक केन्द्र अधिक उपयुक्त रहते हैं। जल विद्युत शक्ति 400-500 किमी से अधिक दूरी पर नहीं भेजी जा सकती, क्योंकि इससे अधिक दूरी पर विद्युत का ह्रास तीव्रता से होना आरम्भ हो जाता है। ⦁ पर्याप्त पूँजी की उपलब्धि – जल-विद्युत शक्ति के उत्पादन में बहुत अधिक पूँजी की आवश्यकता होती है, क्योंकि नदियों पर बाँध बनाने, जलाशयों का निर्माण करने, शक्ति-गृहों का निर्माण करने, खम्भे, तार, टरबाईन, जेनरेटर, इन्जीनियर आदि की आवश्यकता होती है। इसके लिए सार्वजनिक पूँजी लगाई जा सकती है, क्योंकि इसमें निजी पूँजी व्यय करना असम्भव है।। ⦁ आवागमन के साधनों का विकास – विद्युत-शक्ति के उत्पादन के लिए बाँधों, जलाशयों, शक्ति-गृहों, खम्भे, तार आदि को ढोने के लिए तीव्र आवागमन के साधनों की अधिक आवश्यकता पड़ती है; अतः इन साधनों का विकास किया जाना अति आवश्यक है। ⦁ तकनीकी ज्ञान – जल-शक्ति उत्पादन के लिए मशीनरी, तकनीशियन एवं इन्जीनियर आदि आवश्यक होते हैं; अतः आधुनिक तकनीकी विकसित होनी चाहिए। विश्व में जल-विद्युत शक्ति का उत्पादन विभिन्न देशों में जल-विद्युत उत्पादन की क्षमता अलग-अलग पायी जाती है, परन्तु इसके उत्पादन की क्षमता सबसे अधिक अफ्रीका महाद्वीप में निहित है, जब कि यहाँ पर उत्पादन बहुत ही कम होता है। जल-शक्ति का सबसे अधिक उत्पादन कनाडा में किया जाता है। द्वितीय स्थान संयुक्त राज्य का है। मानसूनी देशों में भी जल-शक्ति उत्पादन के अनुकूल भौगोलिक परिस्थितियाँ पायी जाती हैं। आर्थिक विकास के साथ-साथ जल-विद्युत शक्ति का विकास भी विकसित देशों में अधिक हुआ है। वर्तमान । समय में विश्व में 2077 अरब किलोवाट घण्टा जलविद्युत शक्ति का उत्पादन किया जा रहा है। निम्नलिखित देशों का जल-विद्युत शक्ति उत्पादन में प्रमुख स्थान है- रूस – यहाँ विश्व की जलविद्युत शक्ति उत्पादन का 6% भाग विद्यमान है तथा विश्वें में पाँचवाँ स्थान रखता है। यहाँ दक्षिणी सीमा के सहारे-सहारे मध्य एशिया से सुदूरपूर्व तक पर्वत-श्रेणियाँ फैली हैं, जो जल-विद्युत उत्पादन के लिए बहुत ही महत्त्वपूर्ण हैं। यहाँ जल-शक्ति के निम्नलिखित केन्द्र प्रमुख हैं – ⦁ सिम्ल्यान्सकाया संयुक्त देशों के राष्ट्रकुल की नदियों – नीपर, नीस्टर, डॉन, वोल्गा, दिवना, नीमेन, इर्टिश, ओबे, यनीसी, अंगारा आदि पर जलविद्युत उत्पादन केन्द्रों की स्थापना की गयी है। यहाँ पर जल-विद्युत उत्पादन का 85% भाग साइबेरियाई नदियों पर स्थित विद्युत-गृहों से प्राप्त होता है। संयुक्त राज्य अमेरिका – विश्व की जल-शक्ति उत्पादन में संयुक्त राज्य अमेरिका का दूसरा स्थान है। संयुक्त राज्य अमेरिका में जल-विद्युत का विकास सर्वप्रथम न्यू-इंग्लैण्ड राज्य में किया गया था। इसके बाद 1960 ई० से अन्य राज्यों में विकास किया गया। यहाँ प्रमुख जल-विद्युत उत्पादक क्षेत्र निम्नलिखित हैं – ⦁ न्याग्रा प्रपात – जिस पर कई विद्युत शक्ति-गृहों की स्थापना की गयी है। ⦁ मिनियापोलिस में सेंट अन्थोनी प्रपात।। ⦁ अप्लेशियन प्रदेश – पेंसिलवानिया से अलबामा तक। यहाँ प्रपात-रेखा पर बहुत से जलविद्युत उत्पादक केन्द्र स्थापित किये गये हैं–कोलम्बिया, रैले, रिचमण्ड, हार्टफोर्ड, लावेल, मानचेस्टर, फॉलॅरिवर, लारेंस, ट्रेण्टन, वाशिंगटन, बाल्टीमोर, फिलाडेल्फिया, पेटरसन आदि। ⦁ टेनेसी घाटी – नोरिस, बाट्सबरी, कोल्टर, शोल, चिकमंगा, ह्वीलर, विल्सन बाँध आदि। ⦁ कोलम्बिया नदी बेसिन – यहाँ पर लगभग 200 विद्युत उत्पादक केन्द्र स्थापित किये गये हैं, जिनमें ग्राण्ड कूली बाँध, चीफ जोजेफ, केकनेरी, डलेस, जोहनडे एवं बोनविले बाँध मुख्य हैं। ⦁ हूवर बाँध योजना – (कोलोरेडो नदी पर)। ⦁ मिसौरी घाटी परियोजना – यह योजना टेनेसी घाटी योजना की अपेक्षा 6 गुने क्षेत्र को विद्युत आपूर्ति करती है। ⦁ शास्ता बाँध (सेक्रोमेण्टो नदी पर)। ⦁ सैन-ज्वाकिन बाँध (कैलीफोर्निया)। ⦁ इटली – आल्प्स पर्वत के दक्षिणी ढालों तथा एपीनाइन पर्वत के ढालों पर प्रवाहित नदियों से। विद्युत शक्ति का उत्पादन किया जाता है। ⦁ फ्रांस – आल्प्स पर्वत की रोन घाटी में मध्य पठारी भाग तथा पिरेनीज पर्वत-श्रेणी की घाटी में जल-विद्युत शक्ति का उत्पादन किया जाता है। ⦁ स्विट्जरलैण्ड – यहाँ कोयले एवं खनिज तेल की कमी है। इसीलिए यहाँ आल्प्स पर्वत से प्रवाहित नदियों से जल-विद्युत का उत्पादन किया जाता है। ⦁ जर्मनी – जर्मनी ने अपनी जल-विद्युत उत्पादन क्षमता का पूर्ण विकास कर लिया है तथा यहाँ 19 अरब किलोवाट विद्युत का उत्पादन किया जाता है। ⦁ नार्वे तथा स्वीडन – इन दोनों देशों में जल-विद्युत शक्ति का भरपूर विकास किया गया है। यहाँ कोयला, खंनिज तेल एवं प्राकृतिक गैस आदि शक्ति-संसाधनों का पूर्ण अभाव है। विश्व में प्रति । व्यक्ति विद्युत-शक्ति नार्वे में सबसे अधिक उपलब्ध है, जहाँ 99% जनसंख्या को यह शक्ति प्राप्त हो। गयी है। यहाँ पर इस शक्ति पर आधारित रासायनिक उद्योग, कृत्रिम नाइट्रोजन; स्वीडन में लोहा-इस्पात आदि उद्योगों का विकास कर लिया गया है। (i) जापान – एशिया की जल-शक्ति उत्पादन में जापान का महत्त्वपूर्ण स्थान है। जापान में। 1,500 जलविद्युत उत्पादक केन्द्र हैं, जिनमें से 1,000 होशू द्वीप में विकसित हैं। अन्य शक्ति संसाधनों के अभाव के फलस्वरूप जापान ने जल-विद्युत शक्ति का विकास ऊर्जा के वैकल्पिक संसाधन के रूप में किया है। ऊबड़-खाबड़ पठारी धरातल एवं सदावाहिनी सरिताओं के कारण जल-शक्ति के उत्पादन को बल मिला है। जापान ने अपनी सम्भावित जल-शक्ति का पूर्ण विकास कर लिया है, परन्तु माँग के अनुसार पूर्ति नहीं हो पाती; अतः ताप विद्युत भी उत्पन्न की जाती है। (ii) चीन – जल-विद्युत शक्ति उत्पादन में चीन विश्व में चौथे स्थान पर है। चीन में 20% विद्युत शक्ति जल से तथा 80% कोयले से उत्पन्न की जाती है। ह्वांग्हो, यांगटिसीक्यांग, सीक्यांग तथा उनकी सहायक नदियों पर जल-विद्युत केन्द्रों की स्थापना की गयी है। जलविद्युत शक्ति उत्पादन में चीन के निम्नलिखित केन्द्र मुख्य हैं – ⦁ उत्तरी चीन में सुंगारी नदी पर फैंगमैन केन्द्र (iii) भारत – भारत में जल-शक्ति के विशाल भण्डार हैं, परन्तु अभी तक उनका पूर्ण विकास नहीं हो पाया है। सन् 1950 के बाद पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से बहुत-सी बहुउद्देशीय नदी-घाटी परियोजनाओं का विकास किया गया है। एशिया महाद्वीप में जल-विद्युत का सर्वप्रथम उत्पादन भारत में कर्नाटक राज्य के शिवसमुद्रम् नामक स्थान पर 1902 ई० में आरम्भ किया गया था। कोयना, शिवसमुद्रम्, पायकारा, मैटूर, पापनाशम, पेरियार, पल्लीवासल, निजाम सागर, नागार्जुन सागर, हीराकुड, दामोदर घाटी, कोसी व शारदा योजना, माताटीला, रिहन्द, रामगंगा योजना, चम्बल योजना, भाखड़ा-नॉगल योजना आदि प्रमुख बहुध्येयी नदी-घाटी योजनाएँ हैं। जल-विद्युत शक्ति की बढ़ती हुई माँग को देखते हुए भारत सरकार इसके उत्पादन में वृद्धि करने के लिए निजी क्षेत्रों के सहयोग पर भी विचार कर रही है। यहाँ विश्व की 3.1% जल-विद्युत शक्ति उत्पन्न की जाती है। अफ्रीकी देश – अधिकांश अफ्रीकी देश विषुवतरेखीय जलवायु प्रदेश में स्थित हैं तथा इन देशों की धरातलीय रचना भी जलविद्युत उत्पादन के अनुकूल है। इस प्रकार अफ्रीका महाद्वीप में जल-विद्युत शक्ति की सम्भावनाएँ विश्व में सर्वाधिक हैं, परन्तु आर्थिक एवं तकनीकी पिछड़ेपन के कारण इसे शक्ति का विकास नहीं हो पाया है। यहाँ सम्भावित जल-शक्ति का केवल 0.3% भाग का ही विकास हो सका है, परन्तु अब कुछ देशों ने आयातित तकनीकी द्वारा जल-विद्युत शक्ति का उत्पादन आरम्भ किया है, जिनमें मिस्र, दक्षिणी रोडेशिया, जायरे, जाम्बिया आदि देश प्रमुख हैं। |
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