1.

‘झोपंड़ी और चीथड़ों में रानी’ होने का क्या तात्पर्य है?

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बचपन में कवयित्री को अपने घर की सुन्दरता, असुन्दरता और कपड़ों की कोई चिंता नहीं होती थी। वह एक रानी तरह प्रसन्न रहा करती थी।



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