Saved Bookmarks
| 1. |
‘जामुन का पेड़’ नामक पाठक का केन्द्रीय भाव स्पष्ट कीजिए। |
|
Answer» ‘जामुन का पेड़’ कृश्नचंदर का एक प्रसिद्ध व्यंग्य है। व्यंग्य की अपनी विशेषता है कि इसमें समाज में व्याप्त विषमताओं-विसंगतियों को उभारने के लिए अतिशयोक्ति का सहारा लेना पड़ता है। बात को बढ़ा-चढ़ाकर अविश्वसनीयता की हद तक प्रस्तुत किया जाता है। प्रस्तुत पाठ में सरकारी कार्यालयों के काम करने के तौर-तरीकों पर प्रहार करना है। सरकारी बाबुओं की कामचोरी, उनका गैरजिम्मेदाराना रवैया, उनकी संवेदनशून्यता को उजागर करना भी इस पाठ का केन्द्रीय विषय है। |
|