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च) 'जो मादकता के मारे हैं, वे मधु लूटा ही करते हैं।'- इससे कवि क्या कहना चाहते हैं?

उत्तर- 'जो मादकता के मारे हैं, वे मधु लूटा ही करते हैं।' इस पंक्ति के माध्यम से कवि यह कहना चाहते हैं कि जिन लोगों को जीवन जीने का तरीका आता है, वैसे लोग दुखों की परिस्थितियों में भी खुश खोज ही लेते हैं। ऐसे लोग वर्तमान को लेकर आगे बढ़ना पसंद करते हैं। न ही बीती बातों के दर्द को लेकर शोक मनाते हैं।

छ) उक्त कविता में मानव जीवन की तुलना किन-किन चीजों से की गई है? सोदाहरण उत्तर दो।

उत्तर- उक्त कविता में मानव जीवन की तुलना आकाश में टूटते तारों, उपवन में मुरझाए हुए फूलों और मदिरालय के प्याले से की गई है।

जिस तरह अंबर अपने टूटे तारों पर कभी शोक नहीं मनाता। उसी तरह मानव को भी अपने अतीत को लेकर शोक नहीं मनाना चाहिए। कवि ने उपवन का उदाहरण देकर यह कहा है कि अपने प्रिय फूलों के मुरझाए जाने पर मधुवन कभी शोर नहीं मचाता। अतः मनुष्य को भी अपनी बीती बातों को भुलाकर वर्तमान में जीना चाहिए। साथ ही साथ कभी ने मानव जीवन की तुलना मदिरालय से भी की है जिस प्रकार मदिरालय के आंगन में अनेक प्याले हिलखर टूटकर बिखर जाते हैं। पर मदिरालय वैसा ही हमेशा चलता रहता है। उसी प्रकार मनुष्य को अपने बिखरे हुए सपनों को लेकर दुखी होने के बजाय वर्तमान को रंगीन बनाकर सुखी से जीना चाहिए।

ज) इस कविता से हमें क्या शिक्षा मिलती है?

उत्तर- इस कविता से हमें यह शिक्षा मिलती है कि बीते हुए वक्त को भुलाकर वर्तमान की चिंता करनी चाहिए। हर एक के जीवन में सुख और दुखों का अनुभव अवश्य ही प्राप्त होता है। पर हमें बीते हुए दुखों को याद कर वर्तमान में उसका शोक नहीं मनाना चाहिए। मनुष्य ने कभी ना कभी अपने प्रिय वस्तु या प्राणी को खोया ही होगा। जिस प्रकार आकाश अपने तारों के टूटने और पेड़ अपने फूलों के मुरझा जाने से कभी शोक नहीं मनाता। उसी प्रकार मनुष्य को भी अपने प्रिय वस्तु को खोने या उसको याद कर कभी शोक नहीं मनाना चाहिए। बल्कि जीवन के बाकी बचे हुए समय को सुखपूर्वक बिताना चाहिए।



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