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‘इतना तो हो ही गया कि नौ-दस प्राणियों की जान बच गई। वे सब तो आशीर्वाद देंगे’ – मोती के इस कथन के आलोक में उसकी विशेषताएँ बताइए। |
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Answer» पशु या मनुष्य जीवन का कोई मूल्य नहीं यदि वह किसी के काम न आ सके। मोती पशु होकर परोपकार का कार्य करता है। उसे अपनी जान की परवाह नहीं यदि दढ़ियल द्वारा उसकी मौत भी हो जाती है तो उसकी यह परवाह नहीं करता। अपने इस जीवन से उसे संतोष है कि कम से कम कुछ प्राणियों को बचा पाया है। वे उसे आशीर्वाद तो देंगे। मोती विद्रोही स्वभाव का होने पर भी परोपकार का कार्य करता हैं जो उसके चरित्र की सबसे बड़ी विशेषता है। वह एक सच्चा मित्र है। आवश्यकता पड़ने पर अपने मित्र का साथ देता है। भागने का अवसर होने पर भी नहीं भागता। वह अपने मित्र हीरा का साथ नहीं छोड़ता। वह बहुत साहसी और पराक्रमी है। साँड़ को देखकर डरकर भागने की बजाय उससे भिड़ता है और दोनों मित्र मिलकर उसे घायल कर देते हैं। यो मोती के पात्र द्वारा प्रेमचंद ने एक आदर्श व्यक्ति के गुणों को दर्शाना चाहा है। कहानी में पात्र चाहे कोई भी हो प्रेमचंद अपने आदर्श को नहीं छोड़ते। यह मोती के इस द्वारा फलीभूत होता है। |
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