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इस कविता को संवाद रूप में लिखिए।पाठ:- राम लक्ष्मण परशुराम संवाद |
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Answer» Explanation: नाथ संभुधनु भंजनिहारा। होइहि केउ एक दास तुम्हारा॥ आयेसु काह कहिअ किन मोही। सुनि रिसाइ बोले मुनि कोही॥ सेवकु सो जो करै सेवकाई। अरिकरनी करि करिअ लराई॥ राम लक्ष्मण परशुराम संवाद भावार्थ :- इन पंक्तियों में श्री राम परशुराम जी से कह रहे हैं कि – हे नाथ! शिवजी के धनुष को तोड़ने की शक्ति तो केवल आपके दास में ही हो सकती है। इसलिए वह आपका कोई दास ही होगा, जिसने इस धनुष को तोडा है। क्या आज्ञा है? मुझे आदेश दें। यह सुनकर परशुराम जी और क्रोधित हो जाते हैं और कहते हैं कि सेवक वही हो सकता है, जो सेवकों जैसा काम करे। यह धनुष तोड़कर उसने शत्रुता का काम किया है और इसका परिणाम युद्ध ही है। उसने इस धनुष को तोड़कर मुझे युद्ध के लिए ललकारा है, इसलिए वो मेरे सामने आए। please FOLLOW me and MARK me as BRAINLIEST |
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