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इस देश की ही नहीं, पूरे विश्व की एक कौशल्या है। |
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Answer» कौशल्या को राम के निर्वासन से होनेवाला कष्ट सहना पड़ा था और उनके बारे में सोच-सोचकर विह्वल होना पड़ा था। कौशल्या एक प्रतीक है। समूचे विश्व में ऐसी कौशल्याएं हैं, जो हर वर्षा काल में अपने-अपने राम के लिए दुखित हो रही हैं कि ‘मेरे राम का मुकुट भीग रहा होगा।’ मेरी ऐश्वर्य की अधिकारिणी संतान वन में घूम रही है और उसका मुकुट, उसका ऐश्वर्य भीग रहा है। उसका जागरण भीग रहा है। मैं कैसे धीरज धरू? |
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