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“ईश्वर तो कुछ ऐसी ही मूक प्रार्थनाएँ सुनता है और तत्काल सुनता है।”-ईश्वर कैसी प्रार्थनाएँ सुनता है? ‘मजदूरी और प्रेम’ पाठ के आधार पर उत्तर दीजिए।

Answer»

एक अनाथ विधवा ने लेखक के लिए गाढ़े की कमीज सिली। उसने पूरी रात जागकर काम किया। काम करते-करते उसकी आँखों में आँसू आ जाते थे उसको अपना दुःख भरा जीवन याद आ जाता था। कल दिन में उसने कुछ नहीं खाया था। रात में भी खाना नहीं मिला। वह सोच रही थी कि कमीज की सिलाई पूरी होने पर कल उसको खाना मिलेगा। उसकी एक-एक टाँके से आशा बँधी थी। काम करते-करते वह थक गई। कमीज उसके घुटने पर फैली थी। उसने कुछ देर रुककर आराम किया। उसकी खुली आँखें ईश्वर के ध्यान में लीन र्थी। कुछ देर बाद ‘हे राम’ कहकर वह पुन: कमीज सिलने लगी।

लेखक की मान्यता है कि उसके श्रम में उसका प्रेम, पवित्रता तथा सुख-दु:ख मिले हुए हैं। वह कमीज नहीं एक दिव्य वस्त्र है। उसको पहनना तीर्थयात्रा करने के समान है। ईश्वर ऐसे श्रमशील पवित्र लोगों की मूक प्रार्थना अवश्य सुनता है और बिना विलम्ब किए सुनता है। शब्दों में की गई प्रार्थना प्रभावहीन होती है जो शब्द मन से निकलते हैं, वही प्रार्थना ईश्वर के यहाँ सुनी जाती है। प्रेम और सेवा से परिपूर्ण श्रम ही सच्ची प्रार्थना है। उसके लिए शब्दों की जरूरत नहीं होती, न किसी मंदिर, मस्जिद में जाने की आवश्यकता होती है। ऐसा काम किसी संध्या, नमाज, प्रार्थना से कम नहीं होता।



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