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‘ईमानदारी के महत्त्व’ की चर्चा कीजिए।

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प्रेमचंदजी हिन्दी कथा साहित्य में आदर्श लेखक हैं । उन्होंने अपने साहित्य में सामाजिक मूल्यों को स्थापित किया है । प्रस्तुत कहानी ‘नमक का दारोगा’ में भी ईमानदारी को स्थापित किया है । मुंशी वंशीधर के माध्यम से ईमानदारी के महत्त्व को बताया है । वंशीधर को अपनी ईमानदारी के कारण कष्ट उठाना पड़ता है।

परंतु अंत में उसकी ईमानदारी की जीत होती है । मुंशी वंशीधर अपनी ईमानदारी के कारण पंडित अलोपीदीन की नमक की गाड़ियों को पकड़ लेता है । अलोपीदीन धन के बल पर ईमानदारी को कुचलकर न्याय को खरीदकर न्यायालय से मुक्त हो जाता है । परंतु पंडित अलोपीदीन वंशीधर को नौकरी से निकलवा भी देता है।

परंतु वही अलोपीदीन मुंशी वंशीधर की ईमानदारी से प्रभावित होकर आत्मग्लानि महसूस करता है । पश्चाताप करते हुए मुंशी वंशीधर को अपनी जायदाद का मैनेजर बना देता है । इस प्रकार कहानी में ईमानदारी को स्थापित किया गया है।



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