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हमारे समाज में बहुत से लोग भाग्यवादी होते हैं और सब कुछ भाग्य के सहारे छोड़कर कर्म में विरत हो बैठते हैं। ऐसे व्यक्ति ही समाज को प्रगति के पथ पर अग्रसर नहीं होने देते।,आज तक किसी भाग्यवादी ने संसार में कोई महान कार्य नहीं किया। बड़ी-बड़ी खोजें, बड़े-बड़े आविष्कार और बड़े-बड़े निर्माण के कार्य श्रम के द्वारा ही पहुँचते हैं। जब हम परिश्रम से अपने कर्तव्य का पालन करते हैं, तो हमारे मन को अलौकिक आनंद मिलता है। ऐसे व्यक्ति को धर्म के बाह्याचारों के अनुसरण की आवश्यकता नहीं होती; उसका परिश्रम ही उसकी पूजा है। यदि हम अपने कार्य में ईमानदारी से श्रम नहीं करते, तो हमारे मन में एक प्रकार का भय समाया रहता है। कभी-कभी तो हम ग्लानि का भी अनुभव करते हैं।1) भाग्यवादी व्यक्तियों का समाज की प्रगति पर क्या प्रभाव पड़ता है?2) लक्ष्य प्राप्ति में साधन संपन्नता, प्रतिभा और श्रम का क्या योगदान होता है?3) उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक दीजिए।4) ईमानदारी से काम न करने का हमारे हृदय पर क्या प्रभाव पड़ता है?5) हमारे समाज में बहुत से लोग क्या होते हैं?

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1) भाग्यवादी व्यक्ति समाज को प्रगति के पथ पर अग्रसर नहीं होने देते हैं।
2) बड़ी-बड़ी खोजें, बड़े-बड़े आविष्कार और बड़े-बड़े निर्माण के कार्य श्रम के द्वारा ही होते हैं।
3) ‘श्रम का महत्व’।
4) ईमानदारी से काम नहीं करने पर हमारे मन में एक भय समाया रहता है।
5) हमारे समाज में बहुत से लोग भाग्यवादी होते हैं।



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