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हीरा और मोती ने शोषण के खिलाफ आवाज उठाई लेकिन उसके लिए प्रताड़ना भी सही। हीरा-मोती की इस प्रक्रिया पर तर्क सहित अपने विचार प्रकट करें। |
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Answer» हीरा और मोती दोनों ही आजादी के पक्षधर हैं। वे अपने मालिक के यहाँ रहने को तैयार है पर गया के यहाँ उन्हें रहना कतई पसन्द नहीं। वे प्रतिकार करते हैं तो उन्हें बुरी तरह मारा-पीटा जाता है। इसके बाद दोनों बैल कांजीहौस में बंद कर दिये जाते हैं। वहाँ उनकी स्थिति बड़ी दयनीय थी। वहाँ उन्हें चारा-पानी कुछ नहीं दिया जाता था। उस समय हीरा के मन में विद्रोह की ज्वाला दहक उठी और दोनों भागने के लिए दीवार तोड़ते हैं। किन्तु चौकीदार उन्हें देख लेता है और हीरा को बुरी तरह से पीटता है तथा मोटी-सी रस्सी में बाँध देता है। हीरा के अन्दर अभी भी विद्रोह की ज्वाला दहक रही थी। उसका कहना था कि इस प्रकार घुट-घुटकर जीवन जीने से अच्छा है किसी की जान बचाकर मरना। मोती जोर लगाकर दीवार तोड़ देता है। वहाँ पर अधमरे पशु एक-एक कर चले जाते हैं। किन्तु हीरा को छोड़ कर मोती नहीं जा पाता। दोनों एकदूसरे का साथ संकट की घड़ी में नहीं छोड़ते किन्तु मोती की खूब मरम्मत होती है और उसे भी मोटी रस्सी से बाँध दिया जाता है। यों दोनों शोषण के खिलाफ आवाज तो उठाते हैं किन्तु बदले में उन्हें बहुत कष्ट सहना पड़ता है। उन्हें प्रताड़ना सहनी पड़ती है। किन्तु यही प्रताड़ना उन्हें आजादी की ओर ले जाती है। |
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