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Answer» 1673 ई० के मध्य में गुरु तेग़ बहादुर साहिब मालवा प्रदेश की यात्रा पर गए। इस यात्रा में उनकी पत्नी गुजरी जी तथा पुत्र गोबिन्द दास भी उनके साथ थे। - गुरु साहिब सर्वप्रथम सैफ़ाबाद पहुंचे। सैफ़ाबाद में गुरु साहिब की यह दूसरी यात्रा थी। यहां के मनसबदार – नवाब सैफूद्दीन ने उनका पुनः हार्दिक स्वागत किया। उसने गुरु साहिब तथा उनके परिवार को दुर्ग में ठहराया। गुरु साहिब यहां तीन मास तक रहे। यहां रहकर उन्होंने सिख धर्म का प्रचार किया।
- सैफ़ाबाद के पश्चात् गुरु साहिब ने मालवा तथा बांगर प्रदेश के अनेक गांवों तथा नगरों की यात्रा की। डॉ० त्रिलोचन सिंह के अनुसार, इस प्रदेश में गुरु साहिब ने लगभग 10 स्थानों का भ्रमण किया। इनमें से कुछ महत्त्वपूर्ण स्थान ये थे : मूलोवाल, सेखों, ढिल्लवां, जोगा, भीखी, खीवा, समऊं, खियाला, मौंड, तलवंडी साबो, भठिंडा, बराह, धमधान आदि। इन सभी स्थानों पर आज भी गुरुद्वारे बने हुए हैं जो गुरु साहिब की यात्रा की याद दिलाते हैं। मूलोवाल में गुरु साहिब में पानी की कमी को दूर करने के लिए एक कुआं खुदवाया। अन्य गांव भी काफ़ी पिछड़े हुए थे। गुरु साहिब ने इन सभी गांवों में लोगों के कष्टों को दूर करने का प्रयास किया। गुरु साहिब 1673 से 1675 ई० के बीच इस प्रदेश के गांवों का भ्रमण करते रहे और यहां के लोगों में धर्म का प्रचार करते रहे।
प्रभाव-मालवा में गुरु साहिब की यात्राओं का लोगों पर गहरा प्रभाव पड़ा- - गुरु साहिब के प्रेमपूर्वक व्यवहार से प्रभावित होकर वहां के ज़मींदारों ने किसानों के साथ अच्छा व्यवहार करना आरम्भ कर दिया।
- गुरु साहिब ने स्थान-स्थान पर धर्म-प्रचार केन्द्र स्थापित किए। उनके आकर्षक व्यक्तित्व तथा मधुर वाणी से प्रभावित होकर हज़ारों लोग उनके शिष्य बन गए।
- उनके उपदेशों के फलस्वरूप लोगों में नई चेतना का संचार हुआ। उनमें नया धार्मिक उत्साह उत्पन्न हुआ और वे साहसी एवं निडर बने। सिक्खों में ऐसे उत्साह एवं एकता को देखकर मुग़ल सरकार भी चिन्ता में पड़ गई।
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