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Answer» गुरु हरगोबिन्द जी सिक्खों के छठे गुरु थे। उन्होंने सिक्ख पन्थ को एक नया मोड़ दिया। – - उन्होंने गुरुगद्दी पर बैठते ही दो तलवारें धारण की। एक तलवार मीरी की और दूसरी पीरी की। इस प्रकार सिक्ख गुरु धार्मिक नेता होने के साथ-साथ राजनीतिक नेता भी बन गये।
- उन्होंने हरमंदर साहिब के सामने एक नया भवन बनवाया। यह भवन अकाल तख्त के नाम से प्रसिद्ध है। गुरु हरगोबिन्द जी ने सिक्खों को शस्त्रों का प्रयोग करना भी सिखलाया।
- जहांगीर ने गुरु हरगोबिन्द जी को ग्वालियर के किले में बन्दी बना लिया। कुछ समय के पश्चात् जहांगीर को पता चल गया कि गुरु जी निर्दोष हैं। इसलिए उनको छोड़ दिया गया। परन्तु गुरु जी के कहने पर जहांगीर को उनके साथ के बन्दी राजाओं को भी छोड़ना पड़ा।
- गुरु जी ने मुग़लों के साथ युद्ध भी किए। मुग़ल सम्राट् शाहजहां ने तीन बार गुरु जी के विरुद्ध सेना भेजी। गुरु जी ने बड़ी वीरता से उनका सामना किया। फलस्वरूप मुग़ल विजय प्राप्त करने में सफल न हो सके।
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