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ग्राहक का शोषण होने के कौन से कारण है ? |
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Answer» ग्राहकों का शोषण निम्नानुसार विविध कारणों से होता है – 1. मर्यादित माहिती : पूँजीवादी अर्थव्यवस्था में निर्माता और विक्रेता किसी भी वस्तु या सेवा का चाहे जितनी मात्रा में उत्पादन और विक्रय करने के लिये स्वतंत्र हैं । उनके भाव और गुणवत्ता निर्धारण संबंध में कोई विशेष नियम नहीं हैं । ऐसी परिस्थिति में ग्राहक को किसी वस्तु के उपयोग के संबंध में सही जानकारी, ज्ञान के अभाव में कीमत, गुणवत्ता, उपयोगिता, वस्तु के उपयोग की विधि, विक्रय की शर्ते, विक्रय के बाद की सेवा, गारंटी जैसी जानकारी के अभाव में ग्राहक खरीददारी करते समय वस्तु की सच्ची पसंदगी में भूल करता है और शारीरिक, मानसिक और आर्थिक नुकसान भुगतता है । 2. मर्यादित आपूर्ति : जब वस्तु या सेवा की माँग के सामने पूर्ण रूप से वस्तुओं की आपूर्ति न हो तो कृत्रिम कमी खड़ी कर संग्रहखोरी करके अधिक भाव लेकर कालाबाजार जैसी असामाजिक आचरण करके ग्राहकों का शोषण किया जाता है । 3. मर्यादित स्पर्धा : जब भी कोई एक ही उत्पादन या उत्पादन समूह किसी वस्तु में उत्पादन और विक्रय में स्वयं का एकाधिकार रखते है तब वस्तु का भाव हल्की गुणवत्ता, मिलावट, बनावट की संभावना बढ़ जाती है । इस प्रकार ग्राहकों को खराब मालसामान 4. निरक्षरता का ऊँचा प्रमाण : ग्राहकों का शोषण होने का एक कारण प्रजा की निरक्षरता है । ग्राहक जागृति का प्रमाण भी कम है । ग्राहक निरक्षर होने से उत्पादनों, बाजार संबंधी जानकारी का अभाव देखने को मिलता है । इस कारण उत्पादक व्यापारी विविध प्रकार के छल-कपट द्वारा ग्राहकों का अनुचित लाभ उठाते हैं । |
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