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गैरव्यापारिक संस्था में खर्च का वर्गीकरण उदाहरण सहित समझाइए । |
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Answer» खर्च का वर्गीकरण (Classification of Expenses) : गैरव्यापारिक संस्था में खर्च को तीन भागों में बाँटा जा सकता है : (1) पूँजीगत खर्च (Capital Expense) : जो खर्च संस्था में नियमित रूप से या बारंबार न किये जाते हो और जिसका लाभ संस्था को लंबे समय तक मिलता हो तथा जिसके द्वारा संस्था को स्थायी स्वरूप की संपत्ति प्राप्त होती हो उसे पूँजीगत खर्च कहते हैं । जैसे : फर्निचर. यंत्र. जमीन. मकान, लायब्रेरी की पुस्तकें, विनियोग, खेलकूद के साधन, एक्स-रे मशीन, स्वीमिंग पुल वगैरह । पूँजीगत खर्च में संपत्ति की खरीदी से संबंधित तमाम खर्च, स्थापित करने का खर्च, स्टेम्प फीस एवं दस्तावेजी खर्च सभी को पूँजीगत खर्च मानकर संपत्ति की किंमत में जोड़ दिया जाता है । प्रत्येक पूँजीगत खर्च आर्थिक चिट्ठा के संपत्ति-लेना पक्ष में दर्शाये जाते है । (2) राजख खर्च (Revenue Expense) : संस्था की रोजबरोज की प्रवृत्ति चलाने के लिये जो खर्च नियमित रूप से किये जाते हो तथा जिस खर्च का लाभ संस्था को चालू वर्ष तक ही मिलनेवाला हो उसे राजस्व खर्च के रूप में जाना जाता है । जैसे : दिन-प्रतिदिन के संचालन खर्च वेतन, भाड़ा, डाकतार, करवेरा, स्टेशनरी, छपाई खर्च, टेलीफोन खर्च, मोबाईल खर्च, मनोरंजन का कार्यक्रम खर्च, वर्तमान पत्रों का लवाजम, संपत्ति का मरम्मत खर्च, संपत्तियों की घिसाई, मैदान मरम्मत खर्च वगैरह । प्रत्येक राजस्व खर्च उपज-खर्च खाते के उधार पक्ष में बताये जाते है । (3) प्रसारित राजस्व खर्च या स्थगित राजस्व खर्च (Deferred Revenue Expense) : कुछ खर्च ऐसे होते है कि जिनकी लाभ जिस वर्ष खर्च चुकाया गया हो उस वर्ष के अलावा उसके बाद के अमुक वर्षों तक प्राप्त होता रहता है । इसलिये यह खर्च जिस वर्ष किये गये हो उस वर्ष पूरे राजस्व खर्च के रूप में अपलिखित करने के बदले अमुक वर्षों में प्रमाणसर अपलिखित किया जाता है । उसे प्रसारित राजस्व खर्च कहते हैं । ऐसे खर्चों का जो भाग अपलिखित न किया गया हो उसे अवास्तविक संपत्ति के रूप में आर्थिक चिट्ठा में संपत्ति पक्ष में अंत में दर्शाया जाता है । जैसे : बड़े पैमाने पर किया विज्ञापन अभिवृद्धि खर्च, प्राथमिक खर्च, शेयर या डिबेंचर प्रकाशित करने का खर्च या बट्टा । |
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