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गैरव्यापारिक संस्था के आय का वर्गीकरण उदाहरण सहित समझाइए । |
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Answer» आय का वर्गीकरण (Classification of Incomes) : संस्था की आय दो प्रकार की होती है : (1) पूँजीगत आय (Capital Income) : जो आय संस्था को नियमित रूप से या बारंबार प्राप्त न होती हो और जिस आय का लाभ संस्था को लंबे समय तक प्राप्त होता हो उसे पूँजीगत आय कहते हैं । जैसे : ली लोन, प्राप्त वसीयत, निश्चित उद्देश्य के लिये प्राप्त दान, आजीवन सदस्य शुल्क, या आजीवन चंदा वगैरह । गैरव्यापारिक संस्था में प्राप्त ऋण के अलावा की पूँजीगत आय । जैसे : दान, वसियत वगैरह पूँजीकोष में जोड़ दी जाती है । तथा इनामी फंड वगैरह आर्थिक चिट्ठा के दायित्व पक्ष में पूँजीकोष से अलग दर्शाया जाता है । प्रत्येक पूँजीगत आय आर्थिक चिट्ठा के पूँजी-दायित्व पक्ष में दर्शायी जाती है । (2) राजस्व आय (Revenue Income) : जो आय संस्था को नियमित रूप से प्राप्त होती हो और संस्था की प्रवृत्ति में से उत्पन्न होती हो वह आय राजस्व आय कहलाती है । जैसे : विनियोग पर ब्याज, मनोरंजन कार्यक्रम की आय, सदस्यों का वार्षिक शुल्क, पस्ती विक्रय, खेलकूद के मैदान के किराये की आय, लोकर्स का किराया, सरकार से प्राप्त ग्रान्ट, (सहाय या सबसिडी) वगैरह । प्रत्येक राजस्व आय को उपज-खर्च खाते के जमा पक्ष में दर्शाया जाता है । |
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