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गाँधीजी व्यवस्थापक के विरुद्ध झगड़ा करने को तैयार क्यों नहीं थे?

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गाँधीजी व्यवस्था और पद्धति के विरुद्ध लड़ने के पक्षधर थे पर व्यवस्थापक के विरुद्ध लड़ाई करने को तैयार नहीं थे। व्यवस्थापक से झगड़ा करने को वे अपने विरुद्ध झगड़ने के समान मानते थे। वे मानते थे कि हम सब एक ही कूची से रचे गये हैं। एक ही ब्रह्मा की सन्तान हैं। व्यवस्थापक में अनन्त शक्तियाँ विद्यमान हैं। व्यवस्था का अनादर या तिरस्कार होने से उन शक्तियों का अनादर होता है। ऐसा होने से व्यवस्थापक को और संसार को हानि पहुँचती है। इस कारण वे व्यवस्थापक के विरुद्ध झगड़ा करने को तैयार नहीं थे।



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