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गाँधीजी के जीवन में आहार-विषयक प्रयोगों ने महत्त्वपूर्ण स्थान क्यों प्राप्त कर लिया?

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गाँधीजी ने सॉल्ट की पुस्तक पढ़ी जिससे उन्हें आहार सम्बन्धी अन्य पुस्तकों को पढ़ने की प्रेरणा मिली। हावर्ड विलियम की पुस्तक ‘आहार नीति’ में ज्ञानियों, अवतारों और पैगम्बरों के आहार और आहार विषयक विचार पढ़ने को मिले। डॉक्टर मिसेज ऐना किंग्सफर्ड की ‘उत्तम आहार की नीति’ पुस्तक ने भी प्रभावित किया। डॉक्टर एलिन्सन के आरोग्य विषयक लेखों ने गाँधीजी सबसे अधिक प्रभावित किया। वे अन्नाहारी थे और बीमारों को अन्नाहार की ही सलाह देते थे। आहार के हेर-फेर से रोगी को निरोग करने की पद्धति का समर्थन करते थे। इन सब पुस्तकों के अध्ययन के कारण गाँधी जी के जीवन में आहार विषयक प्रयोगों का महत्त्व बढ़ा और अन्नाहार पर उनकी श्रद्धा प्रतिदिन बढ़ने लगी।



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