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गाँधीजी जी कठोर भी थे तो सहृदय भी। क्या आप इस कथन से सहमत हैं? पाठांश के आधार पर स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» गाँधीजी कठोर थे। वे जिसके पीछे पड़ जाते उसे नीचा दिखाकर रहते। अपराधी अधिकारियों के पीछे पड़ गए। उनके विरुद्ध बहुत सारे प्रमाण एकत्रित किए। पुलिस कमिश्नर से मिले और प्रमाण दिये। एक अपराधी के भाग जाने पर कमिश्नर से कहकर उसे पकड़वाया। इतनी कठोरता के बाद भी वे सहानुभूति रखते थे। उन अधिकारियों के अधम होने पर भी उनके विरुद्ध व्यक्तिगत रूप से उनके मन में कोई दुर्भावना नहीं थी। उन अधिकारियों की कंगाली की हालत में गाँधीजी ने उनकी मदद भी की और जोहानिस्बर्ग की म्यूनिसिपॉलिटी में नौकरी दिलाने का प्रयास भी किया। उनके प्रयत्न से उन्हें नौकरी भी मिल गई। गाँधीजी की इस विशेषता से सभी परिचित थे। अत: स्पष्ट है कि गाँधीजी का हृदय कठोर होने के साथ-साथ कोमल भी था। |
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