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एक दकियानूसी मित्र ने मन्नू भंडारी के पिता से क्या कहा?

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पिता जी के एक निहायत दकियानूसी मित्र ने घर आकर अच्छी तरह पिता जी की लू उतारी। उन्होंने कहा – “अरे उस मन्नू की तो मति मारी गई है, पर भंडारी जी आपको क्या हुआ हैं? आपने लड़कियों को आजादी दी, वह लड़कों के साथ हड़तालें करवाती, हुड़दंग मचाती फिर रही है। क्या लड़कियों को यह शोभा देता है? कोई मान-मर्यादा, इज्जत-आबरू का आपको ख्याल है या नहीं?”



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