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एक अति चतुर होते पहिले ही अब गुरु ग्रंथ पढ़ाई में निहित व्यंग को समझाइए​

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O  एक अति चतुर होते पहिले ही अब गुरु ग्रंथ पढ़ाई में निहित व्यंग को समझाइए​...

एक अति चतुर होते पहले ही अब गुरु ग्रंथ पढ़ाई इन पंक्तियों के माध्यम से गोपियां आपस में बातें करते श्री कृष्ण पर कटाक्ष कर रही हैं वह कह रही हैं कि श्रीकृष्ण तो पहले से ही चतुर चालाक थे, वे तो पहले से ही बुद्धिमान थे। अब वह मथुरा जाकर राजनीति पढ़ लिए हैं, गुरु ग्रंथ पढ़ लिए हैं और अब और ज्यादा बुद्धिमान होने की कोशिश कर रहे हैं, अब हमें योग साधना की शिक्षा देने लगे हैं।

गोपियां इन पंक्तियों के माध्यम से श्रीकृष्ण की आवश्यकता से अधिक चतुर बनने की कोशिश पर व्यंग्य करती हैं।

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मरजादा न लही' के माध्यम से कौन-सी मर्यादा न रहने की बात की जा रही है?

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गोपियों ने अपनी तुलना किससे की है?

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