1.

द्वितीय सिक्ख युद्ध पर नोट लिखें।

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1848 ई० में अंग्रेज़ों और सिक्खों में पुनः युद्ध छिड़ गया। अंग्रेजों ने मुलतान के लोकप्रिय गवर्नर दीवान मूलराज को ज़बरदस्ती हटा दिया था। यह बात वहां के नागरिक सहन न कर सके और उन्होंने अनेक अंग्रेज़ अफसरों को मार डाला। अत: लॉर्ड डल्हौजी ने सिक्खों के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी। इस युद्ध की महत्त्वपूर्ण लड़ाइयां रामनगर (22 नवम्बर, 1848 ई०), मुलतान (दिसम्बर, 1848 ई०), चिलियांवाला (13 जनवरी, 1849 ई०) और गुजरात (पंजाब) (फरवरी, 1849 ई०) में लड़ी गईं। रामनगर की लड़ाई में कोई निर्णय न हो सका। परन्तु मुलतान, चिलियांवाला और गुजरात (पंजाब) नामक स्थानों पर सिक्खों की हार हुई। सिक्खों ने 1849 ई० में पूरी तरह अपनी पराजय स्वीकार कर ली। इस विजय के पश्चात् अंग्रेजों ने पंजाब को अंग्रेज़ी राज्य में मिला लिया।



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