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दूसरे आंग्लो-सिक्ख युद्ध की घटनाएं बताओ। |
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Answer» द्वितीय आंग्ल-सिक्ख युद्ध नवम्बर, 1848 ई० में अंग्रेज़ी सेना द्वारा सतलुज नदी को पार करने के पश्चात् आरम्भ हुआ। इस युद्ध की प्रमुख घटनाओं का वर्णन इस प्रकार है- 1. रामनगर की लड़ाई- दूसरे आंग्ल-सिक्ख युद्ध में अंग्रेज़ों तथा सिक्खों के बीच पहली लड़ाई रामनगर की थी। अंग्रेज़ सेनापति जनरल गफ (General Gough) ने 16 नवम्बर, 1848 ई० के दिन रावी नदी पार की तथा 22. नवम्बर को रामनगर पहुंचा। वहां पहले से ही शेर सिंह अटारीवाला के नेतृत्व में सिक्ख सेना एकत्रित थी। रामनगर के स्थान पर दोनों सेनाओं में युद्ध हुआ, परन्तु इसमें हार-जीत का कोई फैसला न हो सका। 2. चिलियांवाला की लड़ाई- 13 जनवरी, 1849 ई० को जनरल गफ के नेतृत्व में अंग्रेज़ी सेनाएं चिलियांवाला गांव में पहुँची जहां सिक्खों की एक शक्तिशाली सेना थी। जनरल गफ ने आते ही अंग्रेज सेनाओं को शत्रु पर आक्रमण करने का आदेश जारी कर दिया। दोनों सेनाओं में घमासान युद्ध हुआ परन्तु हार-जीत का कोई फैसला इस बार भी न हो सका। इस युद्ध में अंग्रेजों के 602 व्यक्ति मारे गए तथा 1651 घायल हुआ। सिक्खों के भी बहुत-से लोग मारे गए और उन्हें 12 तोपों से हाथ धोना पड़ा। 3. मुलतान की लड़ाई- अप्रैल 1848 में दीवान मूलराज ने मुलतान पर दोबारा अधिकार कर लिया था। इस पर अंग्रेजों ने एक सेना भेज कर मुलतान को घेर लिया। मूलराज ने डट कर मुकाबला किया परन्तु एक दिन अचानक एक गोले के फट जाने से उसके सारे बारूद में आग लग गई। परिणामस्वरूप मूलराज और अधिक दिनों तक अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध जारी न रख सका। 22 जनवरी, 1849 ई० को उसने हथियार डाल दिए। मुलतान की विजय से अंग्रेजों का काफ़ी मान बढ़ा। 4. गुजरात की लड़ाई- अंग्रेज़ों और सिक्खों के बीच निर्णायक लड़ाई गुजरात में हुई। इस लड़ाई से पहले शेर सिंह और चतर सिंह आपस में मिल गए। महाराज सिंह तथा अफ़गानिस्तान के अमीर दोस्त मुहम्मद ने भी सिक्खों का साथ दिया। परंतु गोला बारूद समाप्त हो जाने तथा शत्रु की भारी सैनिक संख्या के कारण सिक्ख पराजित हुए। |
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