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दूरसंचार व कम्प्यूटर क्रान्ति के लाभों का संक्षिप्त परिचय दीजिए।यासूचना क्रान्ति का महत्त्व बताइए। या आर्थिक विकास में दूरसंचार व्यवस्था के महत्त्व को समझाइए। याकम्प्यूटर के कोई दो लाभ लिखिए।

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दूरसंचार व कम्प्यूटर क्रान्ति के क्षेत्र में भारत की प्रगति आश्चर्यजनक मानी जाती है। इसके प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं.

⦁    इसका उपयोग उपग्रहों की कक्षा का निर्धारण तथा रॉकेट प्रक्षेपण में किया जाता है।
⦁    प्रतिरक्षा विज्ञान में कम्प्यूटर की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। प्रक्षेपास्त्रों के प्रक्षेपण की प्रणाली कम्प्यूटर पर ही आधारित हैं।
⦁    इंजीनियरिंग का प्रत्येक क्षेत्र कम्प्यूटर पर ही आश्रित है।
⦁    प्रकाशन व छपाई के क्षेत्र की तो इसने काया ही पलट दी है।
⦁    बैंकों, वित्तीय संस्थाओं तथा परिवहन सेवाओं में इसकी बड़ी उपयोगिता है।
⦁    इसमें मौसम सम्बन्धी पूर्व-जानकारियाँ प्राप्त होती हैं।
⦁    चिकित्सा विज्ञान में शल्य चिकित्सा के क्षेत्रों में इसके उपयोग ने मनुष्य के जीवन को सुरक्षित बनाया है।
⦁    शिक्षा के क्षेत्र में अध्यापक व परीक्षाफल विश्लेषण आदि में इसका उपयोग लाभ कर रहा है।
⦁    उद्योग व व्यापार के क्षेत्र में इसने गजब की सफलता पायी है।
28 मार्च, 1998 ई० को भारत ने एशिया के सबसे बड़े सुपर कम्प्यूटर का सफल निर्माण करके इस क्षेत्र में अमेरिका तथा अन्य विकसित देशों के वर्चस्व को कड़ी चुनौती दी है। कम्प्यूटर वास्तव में मानव के विकास का पर्यायवाची बन गया है।
एक अन्य प्रमुख नेटवर्क नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेन्टर (एन०आई०सी०) के रूप में सामने आया जिसने प्रायः सभी जनपद मुख्यालयों को राष्ट्रीय नेटवर्क से जोड़ दिया। एन०आई०सी० आज देश के विभिन्न भागों में 1,400 स्थलों को अपने नेटवर्क के जरिए जोड़े हुए है। एक नेटवर्क बहुत सूक्ष्म अपरचर टर्मिनल्स (बी०एम०ए०टी०) पर आधारित है। एन०आई०सी० का मुख्य उद्देश्य राजकीय कार्यक्रमों के लिए सूचना जारी करना है। लेकिन बहुत अधिक समय से एन०आई०सी० अर्द्धसरकारी संगठनों के लिए भी बैण्डविड्थ उपलब्ध करा रहा है।
आम आदमी के लिए इण्टरनेट का आगमन 15 अगस्त, 1995 ई० को हुआ, जब विदेश संचार निगम लिमिटेड ने देश में अपनी सेवाओं का आरम्भ किया। शुरू के कुछ वर्षों में इण्टरनेट की पहुँच अत्यधिक धीमी रही, लेकिन हाल के वर्षों में बी० एस०एन०एल० के उपभोक्ताओं की संख्या में जबर्दस्त वृद्धि हुई है। 1999 ई० में टेलीकॉम क्षेत्र को निजी कम्पनियों के लिए खोल दिये जाने के परिणामस्वरूप अनेक नये सेवा प्रदाता बेहद प्रतिस्पर्धा विकल्पों के साथ सामने आये। भारत में इण्टरनेट के अनुमानतः 5 लाख कनेक्शन हैं और उसके उपभोक्ताओं की संख्या नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर ऐण्ड सर्विसेज कम्पनीज (नास्कोम) के अनुसार वर्ष 2011 तक 65 लाख के आँकड़े को पार कर चुकी थी और इसमें लगातार बढ़ोतरी जारी थी।
अनेक राज्य सरकारों ने सूचना प्रौद्योगिकी को प्रोत्साहन देने वाली नीतियाँ अपनायी हैं। इनमें ग्राम स्तर तक सम्पर्क और पहुँच बनाने के उद्देश्य पर मुख्य बल दिया गया है। यदि इन नीतियों का सही रूप में परिपालन हुआ तो सचमुच ये सभी मानव समुदाय से जुड़ जाएँगे। सरकारी एजेन्सियाँ आई०टी० के लाभ को सामान्य जन तक पहुँचाने के लिए प्रयत्नशील हैं। भारतीय रेल द्वारा कम्प्यूटरीकृत आरक्षण, आन्ध्र प्रदेश सरकार द्वारा शहरों के मध्य सूचना-प्रणाली की स्थापना तथा केरल सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा फास्ट रिलायबेल इन्सटेण्ट एफीशिएण्ट नेटवर्क फॉर डिस्बर्समेण्ट ऑफ सर्विसेज़ (फ्रेंड्स) जैसी पेशकशों ने इस दिशा में देश के आम नागरिकों की अपेक्षाओं को अत्यधिक बढ़ा दिया है।



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