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दोहे का भावार्थःकाल करै सो आज कर, आज करै सो अब्ब।पल में परलै होयगा, बहुरि करैगा कब्ब ॥८॥ 

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कबीर का कहना है कि हमें जो काम कल करना है, उसे आज ही कर लें और जो आज करना है, उसे तुरन्त अभी कर लें क्योंकि इस क्षण-भंगुर संसार का तो कुछ भी निश्चय नहीं है और क्षण भर में प्रलय होने की आशंका है। इस प्रकार प्रलय होने पर तो किसी भी कार्य को करने का अवसर ही न मिलेगा। अतः आज का काम आज ही करना अच्छा है।



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