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दो विश्व युद्धों के दौरान महिलाओं की पोशाकों में आए अंतर को स्पष्ट कीजिए।

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दो विश्व युद्धों के दौरान महिलाओं की पोशाक में बड़े पैमाने पर परिवर्तन हुए, जिन्हें निम्न रूप में प्रस्तुत किया गया है-

⦁    पैंट पाश्चात्य महिलाओं की पोशाक का अहम् हिस्सा बन गई।

⦁    सुविधा के लिए महिलाओं ने बाल कटवाना प्रारंभ कर दिया।

⦁    बीसवीं सदी तक कठोर और सादगी-भरी जीवन-शैली गंभीरता और प्रोफेशनले अंदाज का पर्याय बन गयी।

⦁    बच्चों के नए विद्यालयों में सादी पोशाक पर जोर दिया गया और तड़क-भड़क को हतोत्साहित किया गया।

⦁    बहुत-सी यूरोपीय महिलाओं ने आभूषण एवं कीमती परिधान पहनना बंद कर दिया।

⦁    उच्च वर्गों की महिलाएँ अन्य वर्गों की महिलाओं से मिलने-जुलने लगीं जिससे सामाजिक अवरोधों का पतन हुआ।

⦁    प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) के मध्य इंग्लैण्ड में 70,000 से अधिक महिलाएँ आयुध कारखानों में काम करती थीं और उन्हें स्कार्फ के साथ ब्लाउज एवं पैंट की कामकाजी वेशभूषा के साथ अन्य चीजें पहननी पड़ती थीं।

⦁    हल्के रंगों के वस्त्र पहने जाते थे। इस प्रकारे कपड़े सादे होते गए।

⦁    स्कर्ट छोटी होती चली गई



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