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‘दो बैलों की कथा के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि जानवरों में भी मानवीय संवेदनाएँ होती है।’ |
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Answer» जानवरों में भी मानवीय संवेदनाएँ होती हैं। कई प्रसंगों पर वे मनुष्य की तरह ही व्यवहार करते हैं। मनुष्य जब जानवरों को पालते हैं तो ये अपने मालिक के प्रति वफादार हो जाते हैं। उनकी मानवीय संवेदनाएँ दिन-प्रतिदिन के व्यवहार में व्यक्त होने लगती हैं। हीरा और मोती कई वर्षों से साथ में रहते-रहते उनमें भाईचारा हो गया था। दोनों की मित्रता बहुत घनिष्ट थी। एकदूसरे को सूंघ-चाटकर आपसी प्रेम व्यक्त करते थे। वे गया के साथ नहीं जाना चाहते। अपने मालिक के यहाँ मरने के तैयार हैं। वे बालिका के पिता को चोट इसलिए नहीं पहुँचाना चाहते क्योंकि वह अनाथ हो जाएगी। वे उसके रोटी के मोल को अच्छी तरह जानते थे। नारी जाति के प्रति भी बैलों के अंदर सम्मान की भावना है। स्त्री पर वार करना वे कायरता समझते हैं। अपने जातिबंधु को गुलामी से मुक्त करवाने का साहसपूर्ण कार्य करते हैं। विपत्ति के समय में एकदूसरे का साथ न छोड़कर सच्चे मित्र का उदाहरण बनते हैं। अपने मालिक के घर पहुँचते ही दढ़ियल को गाँव से बाहर खदेड़ देते हैं। यों पूरी कहानी में दोनों बैलों ने इस प्रकार व्यवहार किया है जैसे कोई मनुष्य करता हो। यों जानवरों में भी मानवीय संवेदनाएँ होती हैं। |
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