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धन्धा (Business) के लक्षण/विशेषताएँ समझाइये । |
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Answer» धन्धे के लक्षण : धन्धे के लक्षण निम्नालिखित हैं : 1. लाभ का उद्देश्य : धन्धे में लाभ का उद्देश्य होता है । व्यापारी कम कीमत में वस्तु क्रय करके अधिक कीमत में वस्तु का विक्रय करते हैं जिससे उसे लाभ प्राप्त होता है । व्यापारी चाहे किसी भी प्रकार का धन्धा करे फिर चाहे वह माल या सेवा का उत्पादन हो या फिर व्यापारी प्रवृत्ति हो लाभ कमाने की इच्छा रखता है । जिस धन्धे में लाभ प्राप्त करने की कोई शक्यता न हो उस व्यापार को कोई करना नहीं चाहेगा । लाभ धन्धे की जीवन-रेखा के समान है । यदि धन्धे में लाभ बन्द हो जाता हैं तो धन्धा बन्द होने की संभावना हो जाती है । 2. जोखिम तथा अनिश्चितता : धन्धे में जोखिम तथा अनिश्चितता का तत्त्व निहित है । आग, दुर्घटना, चोरी, हड़ताल, लूटपाट, दंगे, मांग में कमी, रूचि या फैशन में परिवर्तन, भूकंप, आँधी, तूफान, तकनीक में परिवर्तन, प्रतिस्पर्धा जैसे अनेक जोखिमों के कारण लाभ के स्थान पर कई बार नुकसान होने की संभावना रहती है । 3. तुष्टिगुण का सर्जक : धन्धा तुष्टिगुण का सर्जन करता है । तुष्टिगुण अर्थात् वस्तु एवं सेवाओं से उपभोक्ताओं को संतुष्टि प्रदान करने का गुण । वस्तु के स्वरूप बदलने से स्वरूप – तुष्टिगुण, एक स्थान से दूसरे स्थान पर माल के स्थानान्तरण करने से स्थल – तुष्टिगुण, किसी निश्चित समय तक माल का संग्रह करके उसकी मांग होने पर वितरण करने से माल के समय-तुष्टिगुण का निर्माण होता है । 4. प्रवृत्तियों का सातत्य : धन्धे में प्रवृत्तियों का सातत्य होना चाहिए । धन्धाकीय प्रवृत्तियों में नियमितता होना आवश्यक है । फैक्टरी (कारखाना), कम्पनी, दुकान, गल्ला, लारी, अनाज का व्यापारी, दूध की डेयरी इत्यादि द्वारा विभिन्न प्रवृत्तियाँ निरन्तर की जानी चाहिए । 5. आर्थिक प्रवृत्ति : धन्धा आर्थिक प्रवृत्ति का एक भाग है । आर्थिक प्रवृत्ति में मुआवजा प्राप्त करने का उद्देश्य होता है । उसी प्रकार धन्धाकीय प्रवृत्ति में लाभ के रूप में मुआवजा प्राप्त किया जाता है । 6. विनिमय : धन्धे में वस्तु एवं सेवाओं अथवा वस्तु एवं सेवा के बदले में मुद्रा का विनिमय होता है जिसमें दो पक्षकार होते हैं । क्रेता – सेवा प्राप्त कर्ता, विक्रेता – सेवा देनेवाला । 7. वस्तु एवं सेवा : धन्धे में वस्तु एवं सेवाओं का विनिमय देखा जाता है । वस्तुएँ दृश्य होती हैं, जिन्हें हम देख सकते हैं, स्पर्श कर सकते हैं । जैसे वाशिंग मशीन एक वस्तु है । 8. वित्त की आवश्यकता : धन्धे के लिए प्रारम्भ से अन्त तक वित्त की आवश्यकता रहती है । कारखाने में कच्चे माल में से तैयार माल का उत्पादन करने, व्यापारी को माल क्रय करने के लिए वित्त की आवश्यकता रहती है । |
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