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धारणीय विकास का अर्थ एवं इसकी आवश्यकताएँ बताइए। भारत में धारणीय विकास की रणनीति भी समझाइए। |
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Answer» धारणीय विकास का अर्थ धारणीय विकास वह प्रक्रिया है जो आर्थिक विकास के फलस्वरूप प्राप्त होने वाले दीर्घकालीन शुद्ध लाभों को वर्तमान तथा भावी पीढ़ी दोनों के लिए अधिकतम करती है। यह भावी पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता को बिना कोई हानि पहुँचाए वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करती है। यू०एन०सी०ई०डी० के अनुसार-“धारणीय विकास से आशय ऐसे विकास से है जो वर्तमान पीढ़ी। की आवश्यकताओं को भावी पीढ़ियों की आवश्यकताओं की पूर्ति क्षमता के समझौता किए बिना पूरी करें।” ⦁ प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण एवं कुशलतापूर्वक शोषण किया जाना चाहिए। ⦁ उपलब्ध संसाधनों का उपयोग इस प्रकार किया जाना चाहिए कि भावी पीढ़ी अपनी आवश्यकताओं को सन्तुष्ट करने की योग्यता में कमी न हो। ⦁ ऐसे कार्य न किए जाएँ जो पर्यावरण प्रदूषण को बढ़ाते हैं तथा भावी पीढ़ी की गुणवत्ता को कम करते हैं। धारणीय विकास की आवश्यकताएँ धारणीय विकास की प्राप्ति के लिए निम्नलिखित आवश्यकताएँ हैं ⦁ प्रौद्योगिक प्रगति आगत-निपुण हो, न कि आगत उपभोगी। ⦁ किसी भी स्थिर्सि में नव्यकरणीय संसाधनों की निष्कर्षण की दर पुनर्सेजन की दर से अधिक नहीं होनी चाहिए। ⦁ गैर-नवीकरणीय संसाधनों की अपक्षय दर नवीनीकृत प्रतिस्थापकों से अधिक नहीं होनी चाहिए। ⦁ प्रदूषण के कारण उत्पन्न अक्षमताओं को सुधार किया जाना चाहिए। भारत में धारणीय विकास की रणनीतियाँ धारणीय विकास रणनीति के मुख्य बिन्दु निम्न प्रकार हैं ⦁ ग्रामीण क्षेत्रों में तरल पेट्रोलियम गैस (LPG) के प्रयोग को प्रोत्साहन देना। इसके अतिरिक्त गोबर गैस संयन्त्रको प्रोत्साहन दिया जाए। ⦁ शहरी क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन प्रणाली में उच्च दाब प्राकृतिक गैस (CNG) को बढ़ावा देना। इससे वायु प्रदूषण कम होगा। ⦁ पवनचक्की से ऊर्जा प्राप्त करना। इसमें लागत कम आती है। ⦁ सूर्य किरणों से सौर-ऊर्जा प्राप्त करना यह ऊर्जा का अक्षय स्रोत है। ⦁ पहाड़ी क्षेत्रों में झरनों की सहायता से लघु जलीय प्लाण्ट स्थापित करना। ⦁ विभिन्न आर्थिक क्रियाओं में पारम्परिक ज्ञान का प्रयोग करना। ⦁ जैविक कम्पोस्ट खाद के प्रयोग को प्रोत्साहन देना। ⦁ बेहतर कीट नियन्त्रक तरीकों को अपनाना कीट नियन्त्रण में सहायक विभिन्न कीटों व पक्षियों को संरक्षण देना। |
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