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देव, दनुज, मुनि, नाग, मनुज, सब मायाबिबस बिचारे।तिनके हाथ दासतुलसी प्रभु, कहा अपनपौ हारे ॥ |
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Answer» हे भगवान राम! देवता, राक्षस, मुनि, हाथी, वृक्ष, यवन, देवता आदि सब माया के वशीभूत हैं। इनमें मुझ जैसों के प्रति अपनापन नहीं हो सकता। इसलिए इनसे किसी तरह की सहायता की आशा करना व्यर्थं है। हे प्रभु, मायारहित केवल आप ही हैं। मुझ जैसे भक्तों का ख्याल केवल आप ही रख सकते हैं। इसलिए आपके सिवा मैं और किसी की शरण में जाने की बात नहीं सोच सकता। |
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