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देशीनामा पद्धति में मालवायसी के व्यवहारों का लेखा किस प्रकार होता है, यह समझाइए । |
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Answer» देशीनामा में मालवापसी के व्यवहारों को लिखने के लिए अलग से कोई बही नहीं रखी जाती है । परन्तु माल वापसी की हिसाबी असर उधार बही तथा जमा बही में ही दर्शायी जाती है । यदि मालवापसी रोकड़ से हुई हो तो उसका लेखा रोजमेल या बैठोमेल में किया जाता है । उधार माल खरीद वापसी : जिस महिने में उधार माल की खरीदी हुई हो उसी महिने में उसमें से माल वापस किया जाय तब माल वापसी की रकम को उधार माल खरीदी की रकम में से घटाकर शेष रकम ही जमानोंध में लिखी जाती है । इस प्रकार जब खरीदी का व्यवहार हो तो उसकी रकम प्रथम खाने में लिखने के बदले अंदर के दूसरे खाने में लिखी जाती है जिससे यदि माल वापस हुआ हो तो उसे घटाकर शुद्ध (अंतिम) रकम ही प्रथम खाने में लिखी जाती है । यदि पिछले महिने खरीदे माल में से खरीद वापसी की जाय तो उसे उधार बिक्री समझकर उधारबही में लिखा जाता है । उधार माल बिक्री वापसी : जिस महिने में माल बेचा गया हो यदि उसी महिने में माल वापस आए तो उसे उधार माल बिक्री की रकम में से घटाया जाता है । इस प्रकार मास के अंत में बिक्री में से वापसी घटाकर अंतिम रकम ही प्रथम खाने में लिखी जाती है । यदि पिछले महिने बेचे माल में से माल वापस आया हो तो उसे उधार खरीदी समझकर जमाबही में लिखा जाता है । |
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