1.

चीफ़ की दावत के समय माँ की मनोदशा का वर्णन कीजिए।

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शामनाथ के घर पर शाम को चीफ़ की दावत थी। चीफ़ अंग्रेजी अफसर थे। उनके खुश होने पर शामनाथ को तरक्की मिलने की संभावना थी। तैयारियाँ जोरों पर चल रही थी। शामनाथ की माँ अंग्रेजी नहीं जानती थीं। वे गाँव की थीं। पार्टी में यदि चीफ़ की मुलाकात माँ से हुई तो किस तरह पेश आना चाहिए, उसके बारे में बेटे ने कई हिदायतें दी थीं। फिर भी सात बजते-बजते माँ का दिल धक-धक करने लगा। वे सोचने लगीं अगर चीफ सामने आ गया और अंग्रेजी में कुछ पूछा, तो वे क्या जवाब देंगी? माँ अपनी कोठरी में बैठकर माला जपने लगीं। भगवान् का नाम लिया। हाथ जोड़े। बेटे की चिरायु होने की प्रार्थना की।



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